चेन्नई। तमिलनाडु में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक असमंजस गहराता जा रहा है। राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की अटकलें तेज हो गई हैं, क्योंकि अब तक किसी भी दल या गठबंधन के पास स्पष्ट बहुमत का दावा सामने नहीं आया है। आरोप-प्रत्यारोप, विधायकों की कथित खरीद-फरोख्त, फर्जी समर्थन पत्र और ‘लापता’ विधायकों के दावों ने राज्य की राजनीति को और अधिक पेचीदा बना दिया है।
तमिलनाडु की वर्तमान सरकार का कार्यकाल 10 मई को समाप्त हो रहा है, लेकिन अभी तक अगली सरकार को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। इस बीच राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने स्पष्ट किया है कि 234 सदस्यीय विधानसभा में कम से कम 118 विधायकों का समर्थन साबित करने के बाद ही किसी दल को सरकार गठन का न्योता दिया जाएगा।
23 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव में अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन बहुमत से अभी भी दूर है। वहीं द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) गठबंधन को 73 सीटें और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) गठबंधन को 53 सीटें मिलीं।
बहुमत जुटाने के लिए टीवीके ने कांग्रेस, विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [सीपीआई (एम)] से समर्थन के लिए बातचीत शुरू की। कांग्रेस के पांच विधायकों के समर्थन के बाद टीवीके का आंकड़ा 113 तक पहुंचा, जबकि सीपीआई और सीपीआई (एम) के बाहरी समर्थन से यह संख्या 117 हो गई। हालांकि, विजय द्वारा दो सीटों से चुनाव जीतने के कारण एक सीट छोड़ने की स्थिति में प्रभावी संख्या फिर घट सकती है।
राजनीतिक संकट उस समय और बढ़ गया जब टीटीवी दिनाकरन ने देर रात राजभवन पहुंचकर राज्यपाल से मुलाकात की और टीवीके पर बड़े पैमाने पर हॉर्स ट्रेडिंग के आरोप लगाए। विवाद एएमएमके समर्थित विधायक एस. कामराज को लेकर खड़ा हुआ, जिन्हें कथित तौर पर टीवीके समर्थक बताया गया था।
दिनाकरन ने आरोप लगाया कि राज्यपाल को व्हाट्सऐप के जरिए फर्जी समर्थन पत्र भेजे गए हैं और कामराज ‘लापता’ हैं। हालांकि बाद में कामराज मीडिया के सामने आए और कहा कि उन्होंने आधिकारिक रूप से टीवीके को समर्थन नहीं दिया है। उन्होंने अपने हस्ताक्षर के दुरुपयोग का आरोप भी लगाया। इसके बाद दिनाकरन ने कथित फर्जीवाड़े के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
दूसरी ओर टीवीके ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए एक वीडियो जारी किया, जिसमें कामराज कथित तौर पर समर्थन पत्र पर हस्ताक्षर करते दिखाई दे रहे हैं। टीवीके ने आरोप लगाया कि विजय की सरकार बनने से रोकने के लिए गलत सूचनाएं फैलाई जा रही हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार गठन को लेकर गतिरोध जारी रहता है और हॉर्स ट्रेडिंग के आरोप बढ़ते हैं, तो राज्यपाल केंद्र सरकार को संवैधानिक संकट की रिपोर्ट भेज सकते हैं। ऐसी स्थिति में राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की संभावना बढ़ सकती है। वर्तमान सरकार का कार्यकाल समाप्त होने में अब 48 घंटे से भी कम समय बचा है और चेन्नई में राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज बनी हुई हैं।
