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बस्ती। महान योद्धा एवं राष्ट्र गौरव महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती शनिवार को पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ मनाई गई। पूर्व ब्लॉक प्रमुख एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता कृष्णचन्द्र सिंह के संयोजन में सिविल लाइन्स तिराहा स्थित महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर वरिष्ठ नेताओं एवं गणमान्य लोगों ने माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया।

इसके बाद पं. अटल बिहारी वाजपेयी प्रेक्षागृह में आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने महाराणा प्रताप के संघर्ष, राष्ट्रभक्ति और स्वाभिमान पर व्यापक चर्चा की।

“महाराणा प्रताप स्वतंत्रता और राष्ट्रवाद के प्रेरणास्रोत”

मुख्य अतिथि सांसद जगदम्बिका पाल ने कहा कि भारतीय इतिहास में जब भी वीरता और स्वाभिमान की चर्चा होगी, महाराणा प्रताप का नाम अग्रणी रहेगा। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप ने कभी मुगल दासता स्वीकार नहीं की और मेवाड़ की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष का मार्ग चुना।

उन्होंने कहा कि अकबर की विशाल सेना के सामने झुकने के बजाय महाराणा प्रताप ने संघर्ष किया और मुगल सेना को कड़ी चुनौती दी। उनका जीवन आज भी राष्ट्रवाद, स्वतंत्रता और आत्मसम्मान का प्रतीक है। सांसद ने युवाओं से महाराणा प्रताप के जीवन और राष्ट्रप्रेम से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

महापुरुषों के आदर्शों पर चलने का आह्वान

डा. राम नरेश सिंह ‘मंजुल’, अजय सिंह, श्वेतांक शेखर सिंह, पूर्व आईएएस ओ.एन. सिंह, राना दिनेश प्रताप सिंह और हरीश सिंह ने कहा कि हर युग में समाज और राष्ट्र के निर्माण के लिए महान नायक जन्म लेते हैं। उन्होंने कहा कि भारत के निर्माण में महापुरुषों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है और नई पीढ़ी को उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण का संकल्प लेना चाहिए।

वक्ताओं ने कहा कि संघर्ष की परिस्थितियों से ही महान व्यक्तित्व जन्म लेते हैं और भारत आज अपने महापुरुषों के आदर्शों के बल पर पुनः विश्व में मजबूत पहचान बना रहा है।

हल्दीघाटी के संघर्ष को किया याद

कार्यक्रम संयोजक कृष्णचन्द्र सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप स्वाभिमान और संघर्ष के प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि जब अकबर के सभी प्रयास विफल हो गए, तब हल्दीघाटी का ऐतिहासिक युद्ध हुआ। आज देश जिन चुनौतियों का सामना कर रहा है, उसमें महाराणा प्रताप के संघर्षों से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है।

एपीएन पीजी कॉलेज के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष अमन प्रताप सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप ने अदम्य साहस और वीरता के साथ युद्ध लड़ा। युद्ध में उनके प्रिय घोड़े चेतक का बलिदान इतिहास में अमर है।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां

कार्यक्रम के दौरान ओमनी इंटरनेशनल स्कूल के छात्रों ने महाराणा प्रताप के जीवन पर आधारित नाटक प्रस्तुत किया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। वहीं रामभवन यादव, पंकज गोस्वामी एवं साथियों ने गीतों के माध्यम से महाराणा प्रताप की स्मृतियों को जीवंत किया।

कार्यक्रम में ध्रुवचन्द्र सिंह, संजय सिंह, जनार्दन सिंह, श्याम चन्द्र सिंह, के.के. सिंह, गोपाल यादव, चन्द्रकेश सिंह ‘मनोज’, नरेन्द्र सिंह, आदित्य विक्रम सिंह, अंकित मिश्र, दिनेश पाल, राम अधार पाल, डा. बृजेश पाल, पंकज सिंह, सौरभ सिंह, शिवम सिंह, बीर बहादुर सिंह, विपुल सिंह, महंत पाल, लक्की पाल, आशीष सिंह, रणंजय सिंह, अरुण पाण्डेय, अमन चौधरी, सोनू सिंह, अरविन्द सिंह, अवनीश सिंह, रोहित सिंह, रोली सिंह, आशा सिंह, आनन्द सिंह ‘बाजा’, विनय सिंह सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।


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