Share

नजीबाबाद। हर हर महादेव व जय बद्री विशाल के जयकारों के साथ महाकाल भक्त मंडल के सदस्य केदारनाथ ज्योतिर्लिंग व बद्रीनाथ धाम के लिए रवाना हुए। जहां देवप्रयाग में अलकनंदा व भागीरथी के संगम तट पर संगठन के सदस्यों ने आस्था की डुबकी लगाई। जिसके पश्चात उत्तराखंड की रक्षक देवी मां धारा देवी मंदिर पहुंचे। जहां महाकाल भक्त मंडल के सदस्यों ने मां धारा देवी के समक्ष नतमस्तक होकर आगे की सकुशल यात्रा के लिए प्रार्थना की। इसके पश्चात संगठन के सदस्य सोनप्रयाग पहुंचे और वहां से केदारनाथ की पैदल यात्रा की।

महाकाल भक्त मंडल के सदस्य ने केदारनाथ ज्योतिर्लिंग, भीम शिला व आदि शंकराचार्य के दर्शन किए। इसके पश्चात संगठन के सदस्य बद्रीनाथ धाम पहुंचे। जहां संगठन के सदस्यों ने तप्त कुंड में स्नान किया व बद्रीनाथ धाम के दर्शन किए। इसके पश्चात संगठन के सदस्य भारत के प्रथम गांव माणा पहुंचे। जोकि सरस्वती नदी का उद्गम स्थल है। सोमवार की देर रात सभी भक्तगण सकुशल अपने अपने घर पहुंचे।

महाकाल भक्त मंडल के सदस्य ने बताया कि केदारनाथ धाम भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे प्रमुख और पंच केदार में से एक है। मान्यता है कि यहां दर्शन से मोक्ष मिलता है। बद्रीनाथ धाम को “भू-वैकुंठ” (धरती पर स्वर्ग) माना जाता है, जहां भगवान विष्णु नर-नारायण के रूप में ध्यानमग्न मुद्रा में वास करते हैं।

मान्यता है कि यहां दर्शन करने से पापों का नाश होता है, व्यक्ति जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करता है।

यात्रा में सौरभ कुमार, देवेंद्र प्रजापति, आदित्य अग्रवाल, ऋषभ गुप्ता, आकाश भटनागर, अभिनव अग्रवाल, प्रदीप कुमार, सागर कुमार, ऋषभ कुमार, अभय अग्रवाल, तरुण प्रजापति, शानू, हन्नी, देव, लक्ष्मण आदि रहे।


Share