सुल्तानपुर। शिवगढ़ थाना क्षेत्र के सकवा नहर में में एक अज्ञात महिला (उम्र करीब 28 -30 वर्ष) का शव मिलने के बाद जब कोई वारिस सामने नहीं आया, तो सामाजिक संस्था अंकुरण फाउंडेशन ने इंसानियत की मिसाल पेश की है। कानूनन तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी जब कोई परिजन शव लेने नहीं पहुंचा तो प्रशासन के माध्यम से अंतिम संस्कार के लिए अंकुरण से संपर्क किया।
अंकुरण के सदस्यों के सहयोग से अज्ञात व्यक्ति के शव को श्मशान घाट ले जाया गया।
जहाँ संस्था के अध्यक्ष डॉ आशुतोष श्रीवास्तव एवं मो आरिफ खान ने महिला कांस्टेबल कांस्टेबल पूनम सिंह एवं कांस्टेबल कमला यादव के उपस्थिति में हिंदू रीति रिवाज के अनुसार मुखाग्नि देखकर उसका दाह संस्कार करवाया।
अंकुरण के मीडिया प्रभारी दीपक जायसवाल ने बताया कि हर इंसान का अंतिम विदाई सम्मानजनक होनी चाहिए। संस्था इसके लिए प्रयासरत है, अभी तक करीब 60 लावारिस लाशों का दाह संस्कार संस्था द्वारा किया जा चुका है। अंतिम संस्कार के दौरान वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। स्थानीय लोगों ने अंकुरण की इस संवेदनशीलता की जमकर तारीफ की है।
संस्था से जुड़े चंद्रदेव शुक्ला एवं मुकेश कुमार का कहना है कि संस्था का यह रूप समाज में विश्वास पैदा करता है कि लावारिस होने के बावजूद किसी को श्बेसहाराश् नहीं छोड़ा जाएगा।
संस्था के युवा सचिव एडवोकेट प्रज्ज्वल श्रीवास्तव ने बताया कि भले ही अंतिम संस्कार कर दिया गया है, लेकिन पुलिस रिकॉर्ड में जानकारी सुरक्षित रखी गई है ताकि भविष्य में कभी पहचान होने पर परिजनों को सूचित किया जा सके। शुरुआती जांच में जांच में मृतका के पास ऐसा कोई दस्तावेज या सामान नहीं मिला, जिससे उसकी पहचान हो सके।
