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नई दिल्ली। होर्मुज स्ट्रेट क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच 20 हजार से अधिक भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता गहरा गई है। नेशनल यूनियन ऑफ सीफेरर्स ऑफ इंडिया (NUSI) ने केंद्र सरकार से इस मामले को राष्ट्रीय प्राथमिकता मानते हुए तत्काल निकासी और सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने की मांग की है।

संघर्ष बढ़ने पर हालात और गंभीर होने की आशंका

एनयूएसआई ने आशंका जताई है कि यदि क्षेत्र में संघर्ष और बढ़ता है तो कई जहाज समुद्र में फंस सकते हैं। ऐसी स्थिति में चालक दल को भोजन, दवाइयों और अन्य आवश्यक सुविधाओं की कमी जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

यूनियन के अनुसार जहाजों के शेड्यूल, विभिन्न बंदरगाहों पर प्रतिबंध, फ्लैग स्टेट्स और सुरक्षा अलर्ट के कारण क्षेत्र में कार्यरत भारतीय नाविकों की स्थिति लगातार बदल रही है।

मिसाइल और ड्रोन हमलों का खतरा

खाड़ी क्षेत्र और उसके आसपास कार्यरत नाविकों को मिसाइल तथा ड्रोन हमलों के खतरे के साथ-साथ परिचालन संबंधी प्रतिबंधों और सुरक्षा चेतावनियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके चलते तकनीकी रूप से खुले होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाली सामान्य समुद्री यात्राएं भी अत्यधिक जोखिमपूर्ण बन गई हैं।

नाविकों के परिवारों में बढ़ी चिंता

एनयूएसआई के पदाधिकारियों ने बताया कि नाविकों और उनके परिजनों के बीच लगातार चिंता बढ़ रही है। यूनियन को बड़ी संख्या में ऐसे फोन कॉल प्राप्त हो रहे हैं, जिनमें परिवार अपने सदस्यों की सुरक्षित वापसी को लेकर चिंता व्यक्त कर रहे हैं।

विदेशी जहाजों पर कार्यरत हैं कई भारतीय नाविक

यूनियन ने कहा कि बड़ी संख्या में भारतीय नाविक विदेशी झंडे वाले जहाजों पर कार्यरत हैं, जहां उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी जहाज मालिकों, बीमा कंपनियों, संबंधित देशों और स्थानीय प्रशासन के बीच विभाजित रहती है।

एनयूएसआई ने कहा कि मर्चेंट नेवी के क्रू सदस्य सीमित सुरक्षा संसाधनों के बावजूद वैश्विक व्यापार और भारत की आर्थिक गतिविधियों को सुचारू बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार को तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए।


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