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सीतापुर। मिश्रिख तहसील में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े होने लगे हैं। क्षेत्र के लोगों ने कुछ लेखपालों पर खसरा-खतौनी, खेत की पैमाइश, आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र समेत अन्य राजस्व संबंधी कार्यों के नाम पर अवैध वसूली करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि गरीब और जरूरतमंद लोगों से खुलेआम पैसे मांगे जा रहे हैं, जिससे आम जनता में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि तहसील में बिना सुविधा शुल्क दिए कई काम समय से नहीं हो पा रहे हैं। किसानों और ग्रामीणों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी तहसील और लेखपालों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। आरोप यह भी है कि कुछ कर्मचारी शासन और प्रशासन के निर्देशों की अनदेखी कर मनमानी पर उतारू हैं।

क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि राजस्व विभाग में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार के कारण आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। प्रशासनिक स्तर पर अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।


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